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81 days ago (raj121)[ Report ]

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अपनों के बीच भी कहाँ सुरक्षित
नारी है कहते हैं कि नारी ताड़न
की अधिकारी है ।

जन्मा तुम को जिसने वो भी
एक नारी है गाँव की पगडंडी,
हो या शहर का परिवे शहर
ओर ही नारी का शोषण जारी है ।

गैरों की बात क्या करना दोस्तों
अपनों के बीच भी कहाँ सुरक्षित
नारी है ।

बेटी हो तो सिर बाप के झुक
जाते है दहेज की कुछ इस
कदर फैली महामारी है ।

बेटा घर का चिराग बेटी पराये
घर का राग बेटे बेटी का ये
अंतर द्वंद्व अभी भी जारी है ।

पाप किसी का दोष इसके के
सर मढ़ा जाता है इस जुल्म को
देख भी चुप रहती दुनिया सारी है ।

आने देते नहीं बाहर माँ की
कोख से जन्म से पहले कर
देते मृत्यु हमारी है ।

बेटा हुआ तो पुरुष का ही है
सारा कमाल हो गई बेटी तो ये
माँ की जिम्मेदारी है ।

बेटे की चाह में कुछ यूं गिर
जाते है लोग पहली के होते
करते दूसरे विवाह की तैयारी है ।

चैन से जीने नहीं देगा ये समाज
तुझे यदि घर में बैठी तेरे बेटी
कुंआरी है ।

बेटे को दिए ये महल दुमहलें
तुमने बेटी को मिली सिर्फ़
औरों की चाकरी है ।

आज़ादी का सारा सुख तो है
मर्दों के लिए औरत की दुनिया
तो बस ये चार दीवारी है ।

एक साथ ख़त्म हो जायें यदि
औरतें सारीतो मिट जायेगी ये
जो सृष्टि तुम्हारी है ।

लुट रही है जो हर ओर लाज
ललनाओंकी समाज केठेके दारों
बनती तुम्हारी भी जवाबदारी है ।

महिला दिवस मना के एक पल ये
भी सोचो क्या नारी सिर्फ इस एक
दिन की अधिकारी हॆ ॥


3.35 KB

! Rating: 6.7/10 from 18 Votes

82 days ago (sushil2805)[ Report ]

रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले लड़के
की नजरें अचानक
एक बुजुर्ग दंपति पर पड़ी।
उसने देखा कि वो बुजुर्ग
पति अपनी पत्नी का हाथ पकड़कर
उसे सहारा देते हुए चल रहा था ।
.
थोड़ी दूर जाकर वो दंपति एक खाली जगह
देखकर बैठ गए ।
कपड़ो के पहनावे से वो गरीब ही लग रहे
थे ।
.
तभी ट्रेन के आने के संकेत हुए और
वो चाय वाला अपने
काम में लग गया।
शाम में जब वो चाय वाला वापिस स्टेशन
पर आया तो देखाकि
वो बुजुर्ग
दंपति अभी भी उसी जगह बैठे
हुए है ।
.
वो उन्हें देखकर कुछ सोच में पड़ गया ।
देर रात तक जब चाय वाले ने उन बुजुर्ग
दंपति को उसी जगह पर
देखा तो वो उनके पास गया और उनसे पूछने
लगा: बाबा आप
सुबह से यहाँ क्या कर रहे है ?
आपको जाना कहाँ है ?
.
बुजुर्ग पति ने अपना जेब से कागज का एक
टुकड़ा निकालकर
चाय वाले को दिया और कहा: बेटा हम
दोनों में से किसी को
पढ़ना नहीं आता,इस कागज में मेरे बड़े
बेटे का पता लिखा
हुआ है ।मेरे छोटे बेटे ने कहा था कि अगर
भैया आपको लेने
ना आ पाये तो किसी को भी ये
पता बता देना,
आपको सही
जगह पहुँचा देगा ।
.
चाय वाले ने उत्सुकतावश जब वो कागज
खोला तो उसके होश
उड़ गये । उसकी आँखों से एकाएक आंसूओं
की धारा बहने लगी ।
.
उस कागज में लिखा था कि.........
"कृपया इन दोनों को आपके शहर के
किसी वृध्दाश्रम में
भर्ती करा दीजिए, बहुत बहुत
मेहरबानी होगी..."
दोस्तों ! धिक्कार है ऐसी संतान पर, इसके
बजाय तो बाँझ
रह जाना अच्छा होता है !
इसको इतना शेयर करो कि कोई kamini औलाद
यह पढ़े
तो साला जाग जाये !
यह पोस्ट मेरे दिल को छू गई है & आपके
दिल की मैं
कह नहीं सकता !
अगर आपके दिल छुई है तो is post ko share kre...
Sushil. RAJ
7770043446

! Rating: 6.7/10 from 45 Votes

93 days ago (raj121)[ Report ]


परके झाले ते क्षण ।
निसटून गेली ती वेळ..

जी कधी तुझा मिठीत
गेली होती हसते आता
रात्र मला जी कधी तुझा
सहवासाने धुंद झाली होती,

का छळतो हा उनाड वारा
दिसत नाही का त्याला मी
जळताना..

जो चंद्र होता आपल्या
प्रेमाचा साक्षी तो ही दिसे
आज हळ-हळताना..

कदाचित तू दिलेल्या प्रेमाचा
शपथात्याने ही चोरून
पहिल्या असतील,

वाळूत उमटलेल्या आपल्या
पाऊल खुणा अजून ही तशाच
राहिल्या असतील..

तुझा तोंडावर वाऱ्याने
उडणारे केस कोण आता
सरळ करत असेल..

कोण फिरवेल तुझा गालावरून
हात अन कोण तुझा साठी
झुरत असेल..

हरवली ती संध्याकाळ अन
हरवले ते सुंदर नाते..

परके झाले ते सारे क्षण..

जे कधी फक्त माझे होते..


4.40 KB

! Rating: 6.3/10 from 40 Votes

133 days ago (Abhayjoshi)[ Report ]

होता असा एक काळ सारे नम्र
होते मजपुढे
झेलण्यास शब्द माझा होते उभे
माघेपुढे
आता कुठे तो काळ ,त्याची खून
हि नं राहिली
आसवे माझी स्वतःच्या काबूत
नाही राहिली.

! Rating: 6.6/10 from 50 Votes

145 days ago (raj121)[ Report ]

4.72 KB

पदरात दु:ख माझ्या
देवाने इतक दिलय ।

जित तिथ मला
त्याने हानून पाडल ॥

यना कुणाचा हात हाती
सोबतीला माझ्याना
कुणाच्या शब्दांचा आधार ॥

मनास माझ्या ह्रुदयाला
माझ्या इतक्या खोल आहेत ॥

इजा ची मलमपट्टी करून ही
होणार नाहीत त्या वजा ॥

समुद्राच्या मधोमध
अडकलीय जीवनाची नाव ।

ना कीनारा सापडेना
ना कुठले गाव खोलवर ॥

अंधारात जिवन जाउन
थबकलय साधी प्रकाशाची ना
चाहुल अनं जिवन हातुन निसटलय..

! Rating: 6.0/10 from 43 Votes

176 days ago (raj121)[ Report ]

2.84 KB

आज ती ही मला परखी झाली,
जी कधी माझ्यासाठी झुरत होती..

आज ती ही खोटी वागली,

जी आयुष्यभर साथ देण्याची,
माझ्या शपता खात होती..

तुझी खुप आठवण येते रे,
जी नेहमी असे म्हणत होती..

तुला पहावसं वाटतय रे,
जी हे आतुरतेने सांगत होती..

तुझ्या शिवाय करमत नाही रे,
जी असे बोलत होती..

नाही जाणले तिने मन माझे,
जी माझ्या ह्रदयात राहत होती..

नाहीच कळले तिला प्रेम माझे,
जी माझी न राहता दुस-याची
झाली होती..

! Rating: 7.3/10 from 120 Votes


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